पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सिर्फ शराब मिलने पर वाहन जब्त नहीं किया जा सकता

Major Patna High Court ruling Vehicles cannot be confiscated solely on the grounds of liquor being found in them.

पटना: हाईकोर्ट ने बिहार में शराबबंदी कानून के तहत वाहन जब्ती को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी वाहन में शराब मिलने मात्र से उसे जब्त नहीं किया जा सकता। वाहन की जब्ती के लिए यह साबित होना आवश्यक है कि वाहन मालिक भी अवैध गतिविधि में शामिल था या उसकी मिलीभगत थी।

न्यायमूर्ति पी.बी. बाजंतरी और न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी वाहन का उपयोग शराब या अन्य प्रतिबंधित सामग्री ले जाने के लिए किया जाना ही उसे जब्त करने का पर्याप्त आधार नहीं है। अदालत के अनुसार, जब्ती की कार्रवाई तभी उचित मानी जाएगी जब वाहन मालिक की भूमिका और संलिप्तता के स्पष्ट प्रमाण मौजूद हों।

यह मामला एक मोटरसाइकिल की जब्ती से जुड़ा था, जो वर्ष 2020 में दर्ज एक उत्पाद शुल्क मामले में जब्त की गई थी। पुलिस ने बाइक को रोककर जांच की थी, जिसमें पीछे बैठे व्यक्ति के बैग से करीब 13.9 लीटर अवैध शराब बरामद हुई थी। इसके बाद वाहन को भी जब्त कर लिया गया था।

वाहन की मालिक महिला ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में कहा गया कि शराब मोटरसाइकिल के किसी हिस्से से नहीं, बल्कि पीछे बैठे व्यक्ति के निजी बैग से बरामद हुई थी। ऐसे में वाहन मालिक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यदि कोई व्यक्ति अपने कपड़ों या निजी सामान में प्रतिबंधित वस्तु लेकर यात्रा कर रहा हो, तो केवल इस आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि वाहन का उपयोग अवैध परिवहन के लिए किया जा रहा था। अदालत ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में वाहन जब्त करना कानून की मंशा के अनुरूप नहीं होगा।

हाईकोर्ट ने मामले में वाहन मालिकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए और दो वाहन मालिकों को एक-एक लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बिहार निषेध एवं उत्पाद शुल्क अधिनियम की व्याख्या में एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित होगा। इससे भविष्य में वाहन जब्ती से जुड़े मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को वाहन मालिक की भूमिका और जिम्मेदारी को स्पष्ट रूप से साबित करना होगा।

बिहार में लागू शराबबंदी कानून के बीच आया यह फैसला नागरिक अधिकारों और कानून के संतुलित अनुपालन को लेकर अहम माना जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि निर्दोष वाहन मालिकों को केवल संदेह के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई का सामना न करना पड़े।

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